बंगला नंबर 17 की फुल कहानी, तीन दोस्त की कहनी, भुत की कहानी
बंगला नंबर 17 - ये कहानी तीन दोस्त की है, जिनका नाम है, सुनील, विक्रम और जोन , जो मुम्बई शहर में नोकरी के लिए जाते हैं। तीनों बचपन के दोस्त, कुछ कर गुजरने के लिए मुम्बई शहर जाते हैं। इस भीड भाड वाली जगह में मुकाम हासिल करने की चाह में दर दर भटकते हैं। उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आता है। अपने छोटे से गांव में रह कर कोलेज की पढ़ाई करने वाले विक्रम और सुनील ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें सफलता पाने के लिए दर्द झेलना पड़ेगा। वहीं जोन अपने पापा के बिजनेस में पहले से ही संघर्ष कर चुका था। जिस वजह से उसे इन सब बातों की आदत सी हो गई थी। वह अच्छे से जानता था कि सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलेगी। क्योंकि उसने अपने पापा को दिन रात मेहनत करके देखा था। सभी तीनों को दिन रात भटकते भटकते रात हो जाती, लेकिन न कोई नोकरी और न ही रहने की व्यवस्था होती। तीनों मायुस होकर एक छोटे से होटल में खाना खाते, दरअसल उनके पास कोई खास पैसे नहीं थे। वह तो तीनो दो तीन दिन की व्यवस्था बनाकर निकले थे। उन्हें लगा था कि उन्हें मुम्बई शहर में नोकरी जल्दी मिल जायेगी, और रात को तीनो एक बिल्डिंग के पास पहुंच जाते थे।
कुछ देर बाद वह तीनो बिल्डिंग के पास बैठ जाते थे। एक दो घंटे तक बैठ जाते थे। तभी एक दिन रात को बिल्डिंग के चौकीदार की नजर उन पर पड़ती है। और जोर से डांटते हुए कहता है कि आप इस बिल्डिंग के पास क्या कर रहे हैं। तीनों दोस्त यहां किसी को नहीं पहचानते थे। और न ही उनके पास कोई रहने का ठिकाना है। तीनों अपनी जगह पर खड़े हो जाते हैं, और अपनी बात चौकीदार को बताते हैं। तीनों की बात सुनकर चौकीदार को तरस आ जाता है। उसे एहसास होता है कि, कुछ साल पहले वह भी येसे ही काम मांगने गया था। तब किसी ने उसे सहारा दिया था। और आज वह कम से कम इतने बड़े शहर में जीवन यापन कर पा रहा है। जोन उन तीनों में थोड़ा सा समझदार था। और वह चौकीदार से कही रहने की व्यवस्था की बात करता है। क्योंकि उसे पता था कि अभी उनकी हालत किराया देने की नहीं है। तो उन्हें कोई किराया से कमरा क्यों देगा। तभी चौकीदार फोन से अपने दोस्त से बात करता है, जो वहीं कुछ दुरी पर बंगला नंबर 17 में सफाई का काम करता था। चौकीदार अपने दोस्त को सारी बात बताता है। तभी उसका दोस्त कहता है, कि , मेरे साहब तो दो महीने के लिए बाहर घुमाने के लिए गए हैं। तब तक के लिए मैं इंतजाम कर सकता हूं। यह बात सुनकर तीनों दोस्त बहुत खुश हो जाते हैं। और जल्दी चौकीदार से कहते हैं, कि आप हमें बता दीजिए। हम उनके पास कैसे पहुंच सकते हैं? चौकीदार कहता है, कि बंगला थोड़ी दुर है। रात को वहां कोई टेक्सी भी नहीं मिलेगी। आज़ तुम लोग यहीं सो जाओ। कल सुबह हम लोग साथ चलेंगे। तीनों उसकी बात मान जाते हैं। सुबह उठते ही तीनों दोस्त वहां पहुंच जाते हैं। बंगला की खुबसूरती देखकर तीनों दोस्त हक्का बक्का रह जातें हैं। उन्हें यकीन ही नहीं होता है, कि उन्हें रहने के लिए इतना अच्छा बंगला मिलेगा। बंगले का नोकर तीनों दोस्त को गेस्ट रूम में ले जाता है। तीनों दोस्त रूम में पहुंचकर राहत की सांस लेते है। जल्दी से नहाकर तीनों दोस्त तैयार हो जाते हैं। और काम की तलाश में निकल जाते हैं।
अब रहने की व्यवस्था तो हों गई थी। तलाश तो थी बस एक अच्छे काम की, जिससे उनका गुज़ारा चल सके। लेकिन आज भी उनके साथ वहीं होता है, सुबह से शाम हो जाती है। लेकिन तीनों हतास होकर वापस वहीं आ जाते हैं। नौकर तीनों को खाने का इंतजाम करके रखता है। जिससे उन्हें बहुत राहत मिलती है। आज़ तीनों दोस्त के लिए बंगले की पहली रात है। रात के 12 बजे बिक्रम की नींद खुल जाती है। और वह अपने आप को बंगले के तहखाने में पाता है। जहां पुराना सामान इकट्ठा करके रखा हुआ था। उसे समझ में नहीं आता है कि, वह वहां कैसे पहुंच गया। तभी वह घबराहट में अपने दोस्तों को आवाज लगाता है। लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं देता। तभी उसके कानों में सबकुछ सुनाई देना बंद हो जाता है। और सिर्फ एक औरत के रोने की आवाज आतीं हैं। विक्रम चिल्लाकर पुछता है, कि तुम कहां हो और क्यों रो रही हो? अगले ही पल विक्रम अपने बिस्तर में होता है। और डर के कारण वह पसीने में लथपथ हो जाता है। और वह अपने दोस्तो को जगाता है। सुनील और जोन दोनों उसकी बात का मज़ाक़ उड़ाते हैं। और कहते हैं, कि तुमने कोई सपना देखा होगा। इस बंगले में हमारे इलावा कोई भी नहीं है। और विक्रम भी इस बात का यकीन करके , इस घटना को बुरा सपना समझकर सो जाता है। सुबह उठते ही तीनों दोस्त काम घोजने निकल जाते हैं। लेकिन जैसे ही वह बंगले के बाहर निकलते हैं, कि कोई औरत विक्रम को एक चिट्ठी देती है। जिसमें लिखा होता है, कि तुम इस पते पर आ जाओ तो तुम्हें काम मिल जायेगा। और औरत भागते हुए, विक्रम की नजर से ओझल हो जाती है। तीनों दोस्त सोच में पड़ जाते हैं। कि हमें काम की जरूरत है, यह इस औरत को कैसे पता है। लेकिन तीनों को काम की जरूरत होती है। और सोचते हैं, कि भगवान ने उसे भेजा होगा। और तीनों उस दिसा में निकल जाते हैं। जहां का पता उस कागज में लिखा होता है, वहां पहुंचते ही एक बड़ी बिल्डिंग दिखाई देती है। दरअसल यह एक बहुत बड़ी कंपनी होती है। और तीनों कंपनी के गेट पर पहुंचते हैं। और वह चिट्ठी सिक्योरिटी गार्ड को दिखाते हैं। सिक्योरिटी गार्ड वह चिट्ठी नियोक्ति विभाग को भेज देता है, और जैसे ही वह चिट्ठी प्रबंधक जी को मिलती हैं, तो उसमें मालिक के हस्ताक्षर होते हैं। वह उन तीनों से पुछता है, आप हमारे मालिक को कैसे जानते हैं। तभी विक्रम बोलता है, कि मैं तुम्हारे बोस का दोस्त हु। अब पृबंधक को इन्हें काम देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। कंपनी के मालिक सात दिन की छुट्टी पर बाहर घुमाने गये थे । और उसने मालिक से कोई संपर्क नहीं किया। और काम पर रख लिया। और अपने साथ काम दिखाने की जगह ले जाता है। लेकिन विक्रम अचानक दुसरे रास्ते की तरफ मुड़ जाता है। और वह सीधे मालिक के चेम्बर के सामने पहुंचता है। और दरवाजे के ताले को पासवर्ड से खोल देता है।
कंपनी का मेनेजर यह देखकर आश्चर्यचकित हो जाता है, उसे यकीन ही नहीं होता है, कि पासवर्ड तो कंपनी के मालिक को पता है। अब मेनेजर उसे कोई खास आदमी समझने लगता है। और वह उसे बिना रोके अंदर जाने देता है। जोन और सुनील यह देखकर समझ नहीं पाते हैं, कि विक्रम को यह सब कैसे पता है। तभी विक्रम सभी को मालिक के चेम्बर से बाहर जाने को कहता है। और दरवाजा बंद कर देता है। कुछ ही घंटों बाद मेनेजर को मालिक का फोन आता है। और मालिक मेनेजर से पुछता है, कि मेरा कम्प्यूटर किसी ने इस्तेमाल किया था। तभी मेनेजर सारी बात बता देता है। मालिक बोलता है, कि उसे रोक नहीं तो मैं बारबाद हो जाऊंगा। जैसे ही मेनेजर दरवाजा खोलता है, देखता है, कि विक्रम बेहोश पड़ा है। और मैनेजर उसे उठाकर कुर्सी पर बैठाते हैं। तभी विक्रम को होश आता है, और मेनेजर चिल्लाकर पुछता है, कि तुमने क्या किया मालिक गुस्सा कर राहें है। लेकिन विक्रम को कुछ याद नहीं,कि वह बंगले के गेट से यहां कैसे आया। दरअसल वह बंगला उसी मालिक क हुआ करता था, जो उसने एक लड़की को बेच दिया था। जो कि यही काम करतीं थीं। और मालिक कभी कभी उस लड़की के साथ सोया करता था। जबकि मालिक पहले से शादीशुदा था । और वह यह बात अच्छी तरह जानता था, कि एक दिन यह लड़की संकट बन जाएगी। इसलिए वह उसकी अश्लील वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेता। और एक दिन यह बात लड़की को पता चली, तो दोनों के बीच हाथापाई हुई, जिसमें लड़की के सिर में चोट लग जाती है, और वह दम तोड देती है।
मालिक लड़की को गार्डन में गाड़ देता है। पर जब तीनों दोस्त बंगला में घुम रहे होते हैं, तो विक्रम वहां लात रख देता है। जिस वजह से विक्रम का सीधा संबंध उस लड़की से बन जाता है। और यह सब कुछ वह लड़की विक्रम से करवा लेती है। बदला लेने के लिए और सारी वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर देती है। मालिक को विदेश से ही, गिरफ्तार कर लिया जाता है। उसका काला चिठ्ठा सबके सामने खुल जिता है। और वह बेनाकाब हो, जाता है। उस लड़की ने मरने के बाद भी बदला ले लिया। अब शायद उसकी आत्मा को शांति मिल जायेगी। तीनों दोस्त उस बंगला को बुरा सपना समझकर भुल जाते हैं। और इस दर्दनाक भूतिया कहानी का अंत हो जाता है।
सारांश - इस कहानी का सारांश यह निकलता है, कि हमें दुसरे की मदद करनी चाहिए। जैसे कि चौकीदार ने की थी ।
और अगर आप किसी के साथ बुरा करोगे तो वह मरके भी बदला लेगा।
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