हल्दीघाटी का युद्ध
हल्दीघाटी का युद्ध जुन 1576 मेवाड़ के महाराणा प्रताप का समर्थन करने वाले घुड़सवार व धनुर्धारी का समर्थन प्राप्त है। राणा की सेना और मुगलों के बीच युद्ध हुआ था। जिसका नेतृत्व आमेर के राजा मानसिंह पृथम ने किया था। अकबर की सेना महाराणा प्रताप की सेना से चार गुनी बड़ी थी। इस युद्ध में पृताप को भीलों का सहयोग भी मिला था। इस युद्ध में मुगलों की सेना में मानसिंह सहित कई सेना पति थे। फिर भी महाराणा प्रताप के आगे टिक नहीं पाए। चारण रामा जी साधु महाराणा प्रताप के सेना नायक के रूप में हल्दीघाटी में उपस्थित थे। उन्होंने बड़ी वीरता से युद्ध किया था और मुगलों को सबसे अधिक छतिगसत किया था। 1568 चितोडगड की विकट घेराबंदी ने मेवाड़ की उपजाऊ पूर्व बेल्ट मुगलों को दे दिया था। बल्कि बाकी जंगल और पहाड़ी राज्य पृताप के हाथ में थे। मेवाड़ के माध्यम से अकबर गुजरात के लिए स्थिर मार्ग हासिल करने का आमदा रखता था। लेकिन महाराणा प्रताप की वीरता के मारे आगे नहीं बढ़ पाया 1572 को पृताप सिंह को राजा का ताज पहनाया गया। तो अकबर ने की दुतो को भेजा, और अकबर ने लोगों को वहां का जागीरदार बानाने क...
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