चालाक बन्दर और गंधें की कहानी

चालाक बन्दर और गंधें की कहानी 
एक भरे जंगल में मोटु बन्दर धनु गधा रहते थे। दोनों अच्छे मित्र थे। लेकिन एक दूसरे की चतुराई परखने का अवसर वे कभी नहीं छोड़ते थे।
एक दिन जंगल में घोषणा हुई कि अगले दिन आम महोत्सव आयोजित किया जाएगा। जो सबसे अधिक मीठे आम लायेगा। उसे आमो का बादशाह घोषित किया जाएगा।
मोटु बन्दर खुश हो उठा यह तो मेरे लिए आसान है। पेड़ों पर चढ़ना तो मेरा कोशल स्वाभाविक है। धनु मुस्कराया देखते हैं सफलता किसके पंच में जाती है। 
बंदर ने पुरी रात पेड़ों पर चढ़कर बड़े और सुन्दर आम तोड़े । उसने एक बड़ी टोकरी भर ली।
उधर धनु कहीं दिखाई नहीं दिया।
अगले दिन पृतियोगिता आरंभ हुई। 
मोटु अपनी टोकरी लेकर पहुंचा ।
वह इतने आत्म विश्वास में चल रहा था कि रास्ते में उसका पेर एक पत्थर से टकराया और गिर गया और आम इधर उधर लुढ़क गए। तभी तोते का एक झुंड वहां पहुंचा। वाह निशुल्क नास्ता । कुछ ही समय में आधे आम गायब हो गए। मोटु सिर पकड़कर बैठ गया। इसी बीच धनु शांत भाव से वहां पहुंचा। उसकी पीठ पर एक छोटी सी टोकरी थी।
सभी जानवर हंस पड़े।
बंदर बोला कि इतने कम आम लेकर आए हो, कि तुमने हार मान ली है।
धनु बोला कि पहले इन्हें चखकर तो देखो।
जैसे ही सभी ने आम चखकर देखें सभी कि आंख चमक उठी। 
हाथी बोला इतने मीठे आम तो मेने कभी नहीं खाएं। 
लोमड़ी बोली इतने मीठे आम कहां से लाएं हो। 
धनु ने हंसते हुए कहा मेने पुरे जंगल में सबसे मीठे आम का पेड़ खोजा। अधिक नहीं केवल सबसे उत्तम आम तोड़े।
तभी मोटु बोला लेकिन मेंने तो सबसे अधिक आम तोड़े थे।

धनु ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया। मित्र, संख्या हमेशा गुणवत्ता से अधिक महत्वपूर्ण नहीं होती है। 
सभी जानवरों ने तालियां बाजाई।
मोटु ने भी हंसते हुए कहा आज से मैं भी पेड़ो पर चढ़ने से पहले थोड़ा अधिक सोच-समझकर काम करुंगा।
इसी बीच उपर बैठे तोते ने शरारत की।
उसने एक आम की गुठली नीचे फेंकी।
गुठली सीधे मोटु के सिर पर लगी।
मोटु उपर देखकर बोला, अरे यह किसने किया।
तोता बोला इनाम का कर।
पुरा जंगल ठहाकों से गूंज उठा।
शेर ने हंसते हुए घोषणा की, इस वर्ष आमो का बादशाह धनु होगा। और जंगल के सबसे बड़े हसाडु मोटु होगे।
दोनों मित्र एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा दिए। लोटते समय धनु ने अपनी टोकरी से एक मीठा आम निकालकर मोटु को दे दिया। और बोला सफलता अकेले पाने में नहीं है। बल्कि उसे बांटने में है। 
मोटु ने आम का टुकड़ा खाया, और बोला और समझ आया कि सबसे मीठा आम पेड़ पर नहीं, सच्ची मित्रता में होता है।
दोनों की हंसी देखकर पुरा जंगल मुस्कानें लगा।
शिक्षा- सही चयन और सही मित्रता, दिखावे और घमंड से हमेशा अधिक मुल्यवान होती है।





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