एक किसान और दो घड़े की कहानी।

एक बार एक निराश व्यक्ति ने एक संत से पुछा, कि में बहुत मेहनत करता हूं। लेकिन सफलता नहीं मिलती, किस्मत हमेशा मेरा साथ छोड़ देती है। में क्या करूं,? सन्त ने मुस्कराकर एक सुन्दर कहानी सुनाई। जो आपकी सोच बदल देगी। 

एक किसान और दो घड़े की कहानी।

एक गांव में एक किसान रहता था। उसके पास पानी ढोने के लिए दो घड़े थे। वह उन्हें एक डंडे में बादकर अपने कन्धों पर लटकाकर नदी से पानी लाता । 

पहला घडा : वह एक दम सही था। उसमें कोई दरार नहीं थी। वह पुरा पानी बचाता था।
दूसरा घड़ा: उसमें एक छोटा सा छेद था। घर पहुंचते पहुंचते उसके घड़े में आधा पानी ही बचता था। 
सही घड़े को अपने सही होने का बहुत घमंड था। वहीं फूटा घड़ा आपने आप को बेकार और शर्मिंदगी महसूस करता था। 
एक दिन फूटे घडे ने किसान के सामने रोते हुए कहा, कि में बहुत लाचार हूं। मेरी बजह से आपकी आधी मेहनत बेकार जाती है। आप मुझे बदल क्यों नहीं देते। 
किसान ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा, कि रास्ते में लौटते समय ज़रा ध्यान से देखना। कि तुम्हारी तरफ फूलों से हरा भरा है, और दुसरी तरफ बिल्कुल बंजर पड़ा है।
फुटे घड़े ने हैरान होकर देखा, कि उसकी तरफ हरे भरे रंग बिरंगे फूल खिले हुए थे। 
किसान ने कहा कि में तुम्हारी कमजोरी जानता था, इसलिए तुम्हारी तरफ फुलों के बीज बो दिए थे। तुम्हारे रिसने वाले पानी से उन्हें रोज़ सींचा गया। उन फुलों ने मेरे घर की सोभा बड़ाई। और भगवान को अर्पित हुएं। अगर तुम जैसे हो और वैसे न होते तो यह खुबसूरती कभी पैदा नहीं होती। 

कहानी से सीख:
कमजोरी को ताकत बनाए, भगवान या किस्मत किसी को अधुरा नहीं बनाती। आपकी तथाकथित कमजोरी ही, आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।
•हार न माने मुश्किल और असफलता अपका अंत नहीं। बल्कि अपने जीवन में कुछ नया और खुबसूरत खिलने की शुरुआत है। 

यह कहानी आपको छोटी छोटी असफलताओं से उबरने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। 

 




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